भारत-ब्रिटेन मेगा ट्रेड डील: अप्रैल से सस्ती होगी स्कॉच और विदेशी कारें, एक्सपोर्टर्स की लगेगी लॉटरी!
भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अप्रैल 2026 से लागू होने की तैयारी में है। इस समझौते से जहां भारतीय कपड़ा और रत्न उद्योग को पंख लगेंगे, वहीं विदेशी कारों और स्कॉच के शौकीनों के लिए भी अच्छी खबर है। जानिए इस डील के बड़े मायने।
नई दिल्ली/लंदन: भारत और ब्रिटेन के आर्थिक रिश्तों में एक ऐसा मोड़ आने वाला है, जो अगले दशक की वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देगा। पिछले साल जुलाई में जिस 'ऐतिहासिक' मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगी थी, अब उसके जमीन पर उतरने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सरकारी गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, अप्रैल 2026 वह महीना होगा जब दोनों देशों के बीच व्यापार की दीवारें लगभग गिर जाएंगी।
यह सिर्फ कागजों पर होने वाला कोई समझौता नहीं है, बल्कि यह दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक 'इकोनॉमिक ब्रिज' है। इस समझौते की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी 'विन-विन' स्थिति है। जहां भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाजारों में 'जीरो ड्यूटी' यानी बिना किसी टैक्स के एंट्री मिलेगी, वहीं भारत भी अपने दरवाजे ब्रिटिश विशिष्टताओं के लिए खोलने को तैयार है।
एक्सपोर्टर्स के लिए 'गोल्डन एरा'
भारतीय कपड़ा मंत्रालय और रत्न-आभूषण निर्यातकों के लिए यह खबर किसी जैकपॉट से कम नहीं है। अब तक जो जूते, खिलौने और खेल सामग्री ब्रिटेन के बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा झेलती थी, वे अब बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वहां के स्टोर्स की शोभा बढ़ाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
शौकीनों की जेब को मिलेगी राहत
अगर आप विदेशी कारों या स्कॉच व्हिस्की के शौकीन हैं, तो अप्रैल 2026 आपके लिए खुशियां लेकर आएगा। समझौते के तहत, स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला भारी-भरकम 150% आयात शुल्क तत्काल प्रभाव से घटकर 75% रह जाएगा। इतना ही नहीं, ब्रिटिश कारों पर लगने वाले टैक्स को भी अगले पांच सालों में 110% से घटाकर मात्र 10% पर लाने का रोडमैप तैयार है।
प्रोफेशनल्स को बड़ी सौगात
इस डील का एक मानवीय पहलू 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' भी है। अक्सर विदेशों में काम करने वाले भारतीयों को वहां भी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) टैक्स देना पड़ता था और भारत में भी। अब इस समझौते के लागू होने के बाद, अस्थायी कर्मचारियों को दोहरा भुगतान नहीं करना होगा। यह कदम सीधे तौर पर मिडिल क्लास आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों की बचत बढ़ाएगा।
संसद में गूंजी भारत की धमक
लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में इस हफ्ते इस समझौते पर विस्तार से चर्चा हुई। व्यापार मंत्री क्रिस ब्रायंट ने इसे एक 'बड़ी उपलब्धि' करार देते हुए साफ किया कि लेबर सरकार भारत के साथ इस साझेदारी को 2030 तक 56 अरब डॉलर के पार ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब बस इंतजार है ब्रिटिश संसद की अंतिम हरी झंडी का, जिसके बाद वैश्विक बाजार में भारत की धमक और भी बढ़ जाएगी।