EPFO Salary Limit Hike: देश के संगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों की जेब और उनके भविष्य से जुड़ी एक बेहद अहम सुगबुगाहट राजधानी के गलियारों में तेज हो गई है। मित्रों मोदी सरकार अब उन पुरानी सीमाओं को तोड़ने की तैयारी में है जो सालों से महंगाई की भेंट चढ़ चुकी हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अब महज कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर बदलाव लाने की ओर बढ़ रहा है। इसमें सबसे बड़ा केंद्र बिंदु है EPFO की वेतन सीमा और न्यूनतम पेंशन क्योंकि देश के करोड़ों लोगों को लंबे समय से इसका इंतजार है।

पुरानी लिमिट ओर नई महंगाई: क्यों जरूरी है बदलाव?

दोस्तो आज के दौर में जब घर का बजट संभालना एक चुनौती साबित हो रहा है तब ₹15,000 की EPFO सीलिंग और ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन ऊंट के मुंह में जीरे जैसी लगती है। श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हालिया संकेतों ने कर्मचारियों की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का दायरा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे बल्कि इसका सीधा लाभ उन मज़दूरों को मिले जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

उद्योग और इंसाफ के बीच का ‘बैलेंसिंग एक्ट’

सरकार के सामने चुनौती सिर्फ नियम बदलने की नहीं है बल्कि एक ऐसा संतुलन बनाने की है जिसमें उद्योग जगत की कमर न टूटे और कर्मचारियों को उनका हक मिले। एक तरफ ट्रेड यूनियंस वेतन सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 या उससे अधिक करने की जिद पर हैं तो दूसरी तरफ इंडस्ट्री लागत बढ़ने के डर से सहमी हुई है।

श्रम मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सरकार ‘मिडल पाथ’ यानी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में है। इसमें National Floor Wage को लागू करना सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो पूरे देश में न्यूनतम मजदूरी की एक लक्ष्मण रेखा खींच देगा ओर करोड़ों लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

सिर्फ पेंशन नहीं, सम्मान की बात

EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को लेकर जो आक्रोश लंबे समय से दिख रहा है सरकार उसे शांत करने के मूड में है। पेंशन राशि में बढ़ोतरी न केवल आर्थिक मदद होगी बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक सम्मानजनक जीवन जीने की भी गारंटी भी होगी।

नए लेबर कोड (Social Security Code, 2020) के जरिए सरकार एक ऐसा छाता तैयार कर रही है जिसके नीचे असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी सुरक्षित महसूस कर सकें। अगर यह प्रस्ताव हकीकत बनते है तो यह भारतीय श्रम इतिहास का सबसे बड़ा रिफॉर्म साबित होगा। आने वाले कुछ समय में इसको लेकर डिटेल में जानकारी सामने आने की संभावना बनती नजर आने लगी है इसलिए ये देखने वाली बात होगी कि आने वाला समय देश के करोड़ों असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे कर्मचारियों के भविष्य का ऊंट किस करवट बैठता है।

हेलो दोस्तों मेरा नाम अनीता यादव है और मैं ताज़ा समाचार पर आप सभी के लिए रोजाना...

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